Skip to main content

भाग 2 जंगल – पृथ्वी की सांस🏞️

 भाग 2

जंगल - पृथ्वी की पृथ्वी

प्रस्तावना: जंगल पृथ्वी की धरती क्यों हैं ?


प्रिय, बंजर,

यदि जल पृथ्वी का रक्त है,

तो जंगल उसकी दुनिया है।

जंगल ही वह स्थान हैं 

जहाँ:

हवा शुद्ध होती है

बादल बने हुए हैं

नदियों का जन्म योजनाएँ हैं।

जीव-जंतु और मनुष्य जीवन, स्थिर है।

जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं होता,

वे एक जीवित अलौकिक तंत्र (इकोसिस्टम) होते हैं।

परिणाम के बिना:

कम बारिश होगी

मिट्टी बंजर होगी

नदियाँ सुखदायक

और अंततः मानव जीवन संकट में पड़ जाएगा

इसलिए कहा जाता है:

“जहाँ जंगल हैं, वहाँ जीवन है।”

1. जंगल और जीवन का संबंध

पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत जंगल से हुई।

पहले पेड़-पौधे आये,

फिर जीव-जन्तु,

और अंत में मनुष्य।

जंगल हमें देते हैं:

ओ निगमसी( O 2 ,) CO2, N, )

भोजन

औषधियाँ

लकड़ी

जलवायु संतुलन

हमारी हर दुनिया, , जंगल ही है। और हर एक जीव का,

किसी न किसी जंगल की मांद है।

2. भारत के जंगलों की विविधता

भारत विश्व के संयुक्त राष्ट्र में है

जहां जंगल की विविधता पाई जाती है।

प्रमुख प्रकार के जंगल

तीव्र वर्षावन

शुष्क पर्णपाती वन

पर्वतीय वन

मैंग्रोव वन

हर जंगल की अपनी:

जलवायु

वनस्पति

जीव-जंतु

एक

3. जंगल और जल का गहरा रिश्ता

जंगल और जल एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

जंगल का जल पर प्रभाव

ट्रकों को तैयार किया जाता है

मूल पानी को जमीन में उतारा जाता है

नदियों का प्रवाह अनवरत रहता है

बाढ़ और सूखापन कम होता है

जहां जंगल कटे हैं,

वहाँ:

कम बारिश होती है

नादियाँ सुखती हैं

मिट्टी बह जाती है

4. जंगल और जलवायु संतुलन

जंगल पृथ्वी के प्रमुख नियंत्रक होते हैं।

:

कार्बन प्लांट को बनाया जाता है

ऑक्सीजन ओवरसे हैं

तापमान कम करते हैं

वातावरण को नम हैं

इसलिए जंगल को

पृथ्वी का फेफड़ा कहा जाता है।

5. जंगल और आदिवासी समाज

भारत के करोड़ों लोग

सीधे-सीधे जंगल पर प्रतिबंध हैं।

नवयुवक परिवार का जीवन:

जंगल के भोजन पर

औषधालय पर

जल प्रबंधन पर

पारंपरिक संस्कृति पर

इजाज़त है।

उनके लिए जंगल:

बाजार नहीं

बल्कि जैसा परिवार होता है।

6. जंगल का विनाश: विकास की कीमत

पिछले 100-150 वर्षों में

जंगल की तेजी से तेजी है।

मुख्य कारण

औद्योगिक विस्तार

षडयंत्रों

हाल

सड़क और रेल परियोजनाएँ

कृषि विस्तार

कारण:

गैजेट्स का आवास नष्ट हो गया

ग्लूकोज़ बढ़ाएँ

कब्ज़ा किये गये

7. एक कहानी: जंगल का आखिरी पेड़

एक गाँव जो घने जंगलों से घिरा हुआ था।

वहाँ नदियाँ रफ़्तार चलती हैं

पक्षी की आवाज गूंजती थी

हवा में रहता था

धीरे-धीरे:

पेड़ काटने लगे

सड़क बनी

यह शुरू हुआ

कुछ वर्षों में:

बी

नदी सूखी

गाँव में गरम मसाला

एक किताब में कहा गया है:

“जंगल नहीं गया…

हमारा जीवन चल गया।”

8. जंगल काटने वाले के परिणाम

प्रभाव

प्रतिशत में वृद्धि

वर्षा में कमी

सूजन और गुर्दे की पथरी

सामाजिक प्रभाव

जोड़ों का दर्द

अंतिम संस्कार

जल संकट

आर्थिक प्रभाव

खेती प्रभावित

प्राकृतिक संरचना की कमी

9. जंगल से बचने के उपाय

1.विराट

स्थानीय स्थानीय पेड़-पौधों की दुकानें।

2. स्कूल वन प्रबंधन

गाँव के लोग मिलकर जंगल की रक्षा करें।

3. अवैध सलाह पर रोक

कानूनी और सामाजिक नियंत्रण।

4. पारंपरिक ज्ञान का सम्मान

युवा मित्र की भूमिका।

10. मनुष्य और जंगल का भविष्य

यदि जंगल बचेंगे:

तो जलवायु परिवर्तन

जल संसाधन सुरक्षित

मानव जीवन सुरक्षित रहे

लेकिन अगर जंगल छूट गया:

तो धरती गर्म होगी

पानी कम होगा

जीवन संकट में

लेखक का ब्लॉग से संदेश

,

जंगल हमारे लिए केवल लकड़ी का स्रोत नहीं,

जीवन का आधार हैं।

जब भी आप एक पेड़ के टुकड़े हों,

तो याद रखें:

आप केवल लकड़ी नहीं काट रहे,

भविष्य की एक सांस ले रहे हैं।

भाग 2 का प्रारंभिक संदेश

जंगल पृथ्वी की सांस हैं।

अगर सांस रुक गयी,

तो जीवन भी रुक जाएगा।

इस भाग में हम समझेंगे:

जंगल का इतिहास

विनाश

जनेऊ संघर्ष लोगों ने जन्म से संघर्ष किया और आज भी कर रहे हैं।

और जंगल वापसी एक व्यापारी का रास्ता है।


अध्याय 11

जंगल और मानव सभ्यता

प्रस्तावना: इंसानों की जड़ें कहां हैं?

,

जब हम "सभ्यता" शब्द सुनते हैं, तो हमारे मन में शहर, भवन, सड़क और उद्योग की छवियाँ उभरती हैं।

लेकिन अगर हम इतिहास की गहराईयों में हैं, तो पाएँगे—

मानव सभ्यता की पहली सांस समुद्रतट के बीच ही ली गई थी।

प्रथम आश्रय - जंगल।

पहला भोजन - जंगल।

पहली औषधि - जंगल।

पहला जंगल - जंगल।

जंगल केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं थे,

वे मानव सभ्यता के जन्मदाता थे।

1. आदिम मानव और जंगल

मानव का प्रारंभिक जीवन पूरी तरह से जंगल पर निर्भर था।

शिकार जंगल में

फल-फूल जंगल से

जल संसाधन जंगल में

आश्रय स्थलों और गुफाओं में

मनुष्य का स्वभाव स्वामी नहीं,

बल्कि उसका एक हिस्सा था.

उस समय:

लालटेन सीमित था

उपभोक्ता आवश्यकता तक था

सूची बनाई गई थी

2. कृषि की शुरुआत और जंगल

जब मानव ने खेती शुरू की,

तो उसे जमीन की आवश्यकता हुई।

जंगल को साफ कर खेत बना लिया गया।

तुलना से एक नया रिश्ता शुरू हुआ-

सभ्यता बनाम जंगल।

कृषि:

स्थायी बस्तियाँ बनाई गईं

जनसंख्या अनुपात

प्रदेश का जन्म

लेकिन इसके साथ ही

खेत की खेती भी शुरू हुई।

3. प्राचीन सभ्यताएँ और वन

दुनिया की अनेक सभ्यताएँ

नदियाँ और जंगल के पास विकसित हुआ।

भारत में भी:

आश्रम आश्रम रेगिस्तान में विकसित हुई

ऋषि-मुनि वन में तपस्या करते थे

वन को ज्ञान का स्रोत माना गया

"वनवास" दंड नहीं,

बल्कि आत्मचिंतन का अवसर था।

जंगल ज्ञान, ध्यान और संतुलन का प्रतीक थे।

4. औद्योगिक क्रांति और रेगिस्तान का पतन

18वीं और 19वीं शताब्दी में

औद्योगिक क्रांति ने दुनिया बदल दी।

अब :

लकड़ी का स्रोत बने

केट गए

जहाज निर्माण में उपयोग किया गया

ब्रांड के बैग बने

पहली बार अपार्टमेंट को

व्यवसायिक वस्तु के रूप में देखा गया।

अनुमान से बड़े पैमाने पर विनाश शुरू हुआ।

5. औपनिवेशिक शासन और वन नीति

औपनिवेशिक काल में तटीय राज्य का नियंत्रण छीन लिया गया।

वन कानून बनाया गया,

जिनसे:

स्थानीय स्थानीयता का अधिकार कम हुआ

जंगल की सरकारी संपत्ति घोषित

जनाब कम्यूनिटी हाशिये पर है

जिन लोगों ने उगे से जंगल बचाया,

जापानी को इंजिनियरिंग कहा जाने लगा।

6. आधुनिक सभ्यता और जंगल का संकट

आज की आधुनिक सभ्यता:

शहर का विस्तार

षडयंत्रों

हाँ

हाल

औद्योगिक परियोजनाएँ

इन सबके लिए जंगल की बलि दी जाती है।

विकास के नाम पर:

लाखों हेक्टेयर वन क्षेत्र

जैव विविधता खतरे में

जलवायु संकट गहरा

7. जंगल कट तो संस्कार पर प्रतिबंध

जब जंगल नष्ट होते हैं,

तो प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहता।

सामाजिक प्रभाव

जोड़ों का दर्द

अंतिम संस्कार

जल संकट

आर्थिक प्रभाव

कृषि में कमी

प्राकृतिक संरचना की कमी

प्रभाव

दर

वरा

सूजन और सूखा

समग्र संस्कृति का विनाश ही विनाशकारी है।

8. एक ईश्वरीय प्रश्न

क्या सभ्यता का विकास

जंगल का विनाश किस पर आधारित है?

या फिर हम ऐसा विकास मॉडल कैसे बना सकते हैं

जंगल और संस्कृतियाँ एक साथ कहाँ हैं?

यह प्रश्न केवल पर्यावरण का नहीं,

मानव अनुभव का है।

9. जंगल और आध्यात्मिकता

भारतीय परंपरा में जंगल:

तपस्या का स्थान

ज्ञान का स्रोत

आत्मशुद्धि का माध्यम

कई महापुरुषों ने जंगल में निवास किया

जीवन की सत्य खोज।

जंगल हमें सिखाते हैं:

धैर्य

उदाहरण

कुछ

सह-अस्तित्व

10. भविष्य की राह: सहजीवी सभ्यता

अब समय है कि हम एक नई सोच अपनाएँ—

सहजीवी सभ्यता

जहां मानव जंगल और विरोधी नहीं,

सहयोगी हूँ।

क्या करना होगा?

स्थिर विकास मॉडल अपनाना

पुराने की अंधधुंध कटाई का लाभ

स्थानीय स्थानीय लोगों को अधिकार देना

मूल शिक्षा को बढ़ावा देना

लेखक का संवाद, से संवाद

,

केवल दोस्ती से नहीं।

वह तराजू से है।

अगर हम जंगल को नष्ट कर देंगे,

तो संप्रदाय की परंपराएं ही विनाश हो जाती हैं।

याद रखिए—

जंगल सभ्यता के शत्रु नहीं,

उसके संरक्षक हैं।

अध्याय का निष्कर्ष

मानव सभ्यता की शुरुआत जंगल से हुई थी।

अगर हम जंगल को बचा पाए,

तो सभ्यता का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

लेकिन अगर जंगल छूट गया,

तो आधुनिकता का सारा गौरव

रेत की तरह बकवास।

अंतिम संदेश

इंसानो के धर्म का वास्तविक परीक्षण यह नहीं है,

कि हम समतुल्य बिल्डिंग बना सकते हैं,

बल्कि ये है कि

हम कितने पेड़ बचा सकते हैं। ये ही एक धर्म है, जिसका आधार है जात, पात, ऊंचा नीचा, नीचा दिखाना, छूट, तेरा धर्म ये तो मेरा धर्म ये, मैं ऊंचा, तू नीचे।। ये सब एक प्रपंच है, लोगों को अनादर करने के लिए,और आज हैं।। लोग यह गुलाम है। धर्म के नाम पर.. 

एक सच्चा मनुष्य, मनुष्य, व्यक्ति, पुरुष, मनुष्य, कहीं भी है, जिसमें धर्मों से नहीं बल्कि, मनुष्य से सम्मिलित है, प्रकृति से सम्मिलित है।





अध्याय 12

वन कानून और वन अधिकार

(इतिहास, संघर्ष और न्याय की खोज)

प्रस्तावना: जंगल कौन सा है?

,

यह प्रश्नोत्तरी से पूछा जा रहा है:

जंगल कौन सा है?

सरकार का?

कंपनी का?

या फिर वे लोग जो समुद्र तट से जंगल में बने हुए हैं?

यह अध्याय इसी प्रश्न का उत्तर पुनर्प्राप्ति का प्रयास है।

यह केवल कानून की चर्चा नहीं है,

बल्कि अधिकार, न्याय और साहस की कहानी है।

1. प्राचीन काल में जंगल और अधिकार

प्राचीन भारत में जंगल पर किसी एक व्यक्ति या राज्य का पूर्ण अधिकार नहीं था।

वन संपदा संपत्ति माने गए थे

स्थानीय समुदाय उनका संरक्षण करते थे

लोगों को भर ही संसाधनों की जरूरत थी

बन्धु समाज में:

जंगल "माँ" माना जाता था

पेड़ों को काटने से पहले जैसी परंपराएँ वही थीं

जल, जंगल, ज़मीन-समूह जीवन का आधार थे

उस समय "वन लॉ" लिखित रूप में नहीं थे,

लेकिन परंपराएं ही कानून हैं।

2. औपनिवेशिक काल: जंगल पर राज्य का कब्ज़ा

जब अंग्रेजी भारत आये,

तो वे प्राकृतिक को प्राकृतिक संपदा नहीं,

आर्थिक ढांचे के रूप में देखा।

उन्हें चाहिए था:

लकड़ी के लिए रेल की डिक्की

मजबूत पेड़ के निर्माण के लिए

रो माल के सहायक के लिए

इसी उद्देश्य से उन्होंने वन कानून बनाया।

कॉलोनी वन निगम के परिणाम

जंगल सरकारी संपत्ति घोषित

स्थानीय लोगों के अधिकार अधिकार

सामुदायिक विशेष को "अवैध" घोषित किया गया

जंगल में प्रवेश और संसाधन उपयोग पर प्रतिबंध

जिन लोगों ने जंगल छोड़ दिया जंगल तक,

जंगल को "अतिक्रमणकारी" कहा जाने लगा।

3 . स्वतंत्र भारत और वन कानून

नतीजों के बाद उम्मीद थी कि

स्थानीय समुदाय का अधिकार वापस लिया जाएगा।

लेकिन लंबे समय तक

वन विभाग की सोच समाजवादी ही बनी रही।

जंगल को देखा:

लकड़ी का स्रोत

फर्म के कच्चे माल का भंडार

भूमि विकास के लिए

इस सोच का कारण:

बड़े पैमाने पर जंगल कट

कब्ज़ा किये गये

पारंपरिक अधिकार समाप्त हो गये

4. वन भूमि की समस्या मुख्य

1. स्थानीय लोगों की अनदेखी

ऊपर से बनाई गई नीतियाँ,

जिसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी कम थी।

2. जंगल को केवल संसाधन

जंगल को जीवन प्रणाली की बजाय

आर्थिक वस्तु माना गया।

3. अधिकार की अज्ञातता

जनजातीय और ग्रामीण समुदाय

अपने अधिकार को लेकर असमंजस में रह रहे हैं।

5. वन अधिकार की अवधारणा

समय के साथ यह समझ में आता है

जंगल बचाने में सबसे बड़ी भूमिका

स्थानीय स्थानीय लोगों की तलाश है।

इससे "वन अधिकार" की अवधारणा मजबूत हुई।

वन अधिकार का अर्थ

जंगल में रहने का अधिकार

जंगल के उपकरणों का उपयोग

पारंपरिक उत्पाद का अधिकार

व्यावसायिक निर्णय का अधिकार

यह केवल भूमि का अधिकार नहीं है,

जीवन शैली का अधिकार है।

6. वन अधिकार कानून का महत्व

वन अधिकार कानून का मुख्य उद्देश्य था:

ऐतिहासिक अन्याय को सुधारना

युवाओं और वनवासियों को अधिकार देना

जंगल संरक्षण में उनकी भूमिका

यह मुख्य प्रोविज़न है

व्यक्तिगत वन भूमि पर अधिकार

मॉडल वन बनाने का अधिकार

लघु वनोपज पर स्वामित्व

पारंपरिक सिद्धांत

7. एकल वन अधिकार: वास्तविक शक्ति

वन अधिकार कानून का सबसे महत्वपूर्ण भाग है:

11 अधिकार

इसका अर्थ है:

पूरा गाँव जंगल के संरक्षक

सामूहिक निर्णय

साधन का उपयोग

यह मॉडल बताता है कि

जंगल से भागने का सबसे अच्छा उपाय है:

“उन लोगों के हाथ में जंगल करो।”

जो लोग प्यार करते हैं।"

8. ज़िम पर ज़ायकेदार

हालाँकि कानून बने,

लेकिन ज़मीनी स्थिति में कई जगहें हैं।

आने की समस्या

मृतक की छुट्टी

कागजी प्रक्रिया जटिल

अधिकारियों की अनिच्छा

कंपनियों का दबाव

कई समुदाय आज भी

अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

9. एक प्रेरक उदाहरण

कुछ खेत में जब रसेल वन राइट मिले:

कटाव अवैध रुकी

जंगल का मिश्रण

जल स्रोत पुनः प्रकाशित

गाँव की आय बाज़ार

यह शिष्य है कि

जंगल का मूल रूढ़िवादी स्थानीय समुदाय ही होता है।

10. वन कानून और विकास का राक्षस

कई बार वन कानून और विकास मित्र

एक-दूसरे के विरोध में वोट हो जाते हैं।

उदाहरण:

परियोजना परियोजनाएँ

औद्योगीकरण

हाल

सड़क निर्माण

इनके लिए जंगल काटे जाते हैं,

और स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित होते हैं।

11. समाधान: रोल वन नीति

1. स्थानीय समुदाय की भागीदारी

निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका रहेगी।

2. रेखीय प्रक्रियाएँ

वनाधिकार प्रभाव का साझीदार।

3. स्थिर विकास मॉडल

जंगल बचाते हुए विकास करना।

4. विद्यालय पर्यवेक्षक

जंगल संरक्षण में स्थानीय समितियाँ।

लेखक का संवाद से संवाद

,

वन कानून में केवल कागज पर लिखित नियम नहीं हैं।

वे लाखों लोगों के जीवन के प्रश्न हैं।

यदि कानून न्यायपूर्ण होगा,

तो जंगल भी सुरक्षित रहो

और समाज भी साथी रहे।

अध्याय का निष्कर्ष

परिणाम पर अधिकार का प्रश्न

केवल जमीन का प्रश्न नहीं है,

यह प्रतिभा, संस्कृति और सम्मान का प्रश्न है।

सच्चा वन कानून वही है

जो जंगल को भी बचाए

और जंगल में रहने वाले लोगों को भी।

अंतिम संदेश

जंगल सरकार की संपत्ति नहीं,

मानव के अवशेष हैं।

और जिन लोगों ने नौ तक

यह खड़ियाघर की रक्षा की है,

उन्हें उनका अधिकार मिलना ही चाहिए।



अध्याय 13

जंगल कटने के कारण

(विनाश की मूल और विकास का भ्रम)

प्रस्तावना: जंगल क्यों खो रहे हैं?

प्रिय,

आज दुनिया के हर हिस्से से एक ही खबर आती है—

जंगल घाट जा रहे हैं, पेड़ काटे जा रहे हैं, और धरती का हरा आकर्षण कम हो रहा है।

यह केवल पर्यावरण की समस्या नहीं है।

यह मानव जाति के भविष्य से संबंधित प्रश्न है।

जंगल खुद से नहीं कटते।

उन्हें कोई न कोई कटता है—

और उसके पीछे कोई ना कोई कारण होता है।

इस अध्याय में हम समझेंगे कि

जंगल कटने के पीछे असली कारण क्या हैं।

1. जनसंख्या वृद्धि और भूमि की मांग

जैसे-जैसे मानव आबादी,

वैसे-वैसे जमीन की मांग भी बढ़ी।

लोगों को करना चाहिए:

घर बनाने के लिए जमीन

खेती के लिए जमीन

शहरों के विस्तार के लिए जगह

इसके लिए सबसे आसान तरीका क्या है?

जंगल।

धीरे-धीरे:

जंगल को साफ कर खेत बनाये गये

दुर्भाग्य से शहर बनाया गया

इस प्रक्रिया में लाखों हेक्टेयर वन क्षेत्र समाप्त हो गया।

2. कृषि विस्तार

खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए

बड़ी मात्रा में जंगल की खेती में बदलाव किया गया।

विशेष रूप से:

वाणिज्यिक खेती

नकदी फसलों

बड़ी कृषि परियोजना

जिनके कारण:

जंगल का विनाश

मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट

जल प्रबंधन पर दबाव

3. औद्योगिक विकास एवं खनन

आधुनिक उपकरण चाहिए:

लोहा

कोयला

बॉक्स

अन्य खनिज

ये खनिज तत्व मौजूद हैं?

बारंबार जंगल के नीचे।

इसलिए सिक्के के लिए:

बड़े क्षेत्र के जंगल कटे हुए हैं

पहाड़ खोदे जाते हैं

नदियाँ बनती हैं

खेती केवल जमीन नहीं खोदा,

वह जंगल की आत्मा को भी नष्ट कर देती है।

4. लकड़ी का व्यापार

लकड़ी का उपयोग से उपयोगी रही है,

लेकिन आधुनिक समय में यह एक बड़ा व्यवसाय बन गया है।

लकड़ी का उपयोग:

फर्नीचर

निर्माण

कागज उद्योग

बैल

के लिए जाना जाता है.

अवैध कटान भी एक बड़ी समस्या है।

कई स्थानों पर:

रात में पेड़ काटे जाते हैं

जंगल से चोरी-छिपे लकड़ी निकाली जाती है

यह सब लालच का परिणाम है।

5. सड़क, रेल और शहरीकरण

आधुनिक विकास के लिए

धोख़ा-ढाँचा बनाया जाता है:

हाँ

रेल लाइन

हवाई अड्डा

औद्योगिक क्षेत्र

इन सबके लिए बड़ी मात्रा में जमीन चाहिए।

और यह ज़मीन अक्सर जंगल से ही ली जाती है।

शहर फ़ेलते हैं,

तो जंगल अचंलते हैं।

6. लॉन्च और प्रोजेक्ट प्रोजेक्ट

बड़े बांध,

औद्योगिकीकरण,

विशेष आर्थिक क्षेत्र—

इन सबके लिए विशाल भूमि की आवश्यकता होती है।

परिणाम:

हजारों जंगल डूब गये हैं

कई कंपनियों का आवास ख़त्म हो गया है

स्थानीय सामुदायिक समुदाय होते हैं

7. जंगल की आग और प्राकृतिक कारण

कुछ जंगली प्राकृतिक वस्तुओं से भी नष्ट होते हैं:

बिजली गिरना

अत्यधिक गरमी

पौ

लेकिन आज सबसे ज्यादा आग

मानव असमानता का कारण दिखता है।

उदाहरण:

खेती के लिए जमीन साफ ​​करना

लकड़ी निकालने की कोशिश

लापरवाही

8. अवैध व्यवसाय एवं व्यवसाय

कई क्षेत्रों में:

जंगल की ज़मीन पर अवैध बस्तियाँ बसती हैं

धीरे-धीरे पूरा क्षेत्र साफ हो जाता है

यह प्रक्रिया धीमी गति से होती है,

लेकिन परिणाम बहुत गंभीर होते हैं।

9. सरकारी नीतियाँ और वफादार पर्यवेक्षक

कभी-कभी जंगल कटने के पीछे

सरकारी नीतियाँ भी जिम्मेदार हैं।

उदाहरण:

विशेषज्ञ को वन भूमि देना

टैंक की मात्रा

फ़्रैंच पर्यवेक्षक

यदि नीतियाँ चलती न हों,

तो जंगल सबसे पहले प्रभावित होते हैं।

10. उपभोक्तावाद और हमारी परंपरा

जंगल केवल सरकार या विक्रेता ही नहीं काटते,

हम भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।

जब हम:

कागज का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है

लकड़ी के उत्पाद मानक हैं

सामग्री का अंधधुंध उपयोग करते हैं

तो अछूते रूप से जंगल पर दबाव बढ़ा हुआ है।

हमारी भी

जंगल विनाश का एक कारण है।

11. एक कहानी: लाल का जंगल

एक घाना जंगल था,

जहां पक्षियों की आवाज गूंजती थी।

एक दिन कुछ लोग आये और बोले:

“यहाँ लकड़ी का अच्छा व्यापार होगा।”

धीरे-धीरे:

पेड़ काटने लगे

सड़क बनी

ट्रक आने लगे

कुछ पुराने में:

बी

नदी सूख गई

गांव उजाड़ दिया गया

लोगों ने पैसा तो कमाया,

लेकिन खोया जीवन।

12. जंगल काटने के परिणाम

प्रभाव

प्रतिशत में वृद्धि

वर्षा में कमी

मिट्टी का कटाव

सामाजिक प्रभाव

जोड़ों का दर्द

जल संकट

उत्पाद का नुकसान

आर्थिक प्रभाव

खेती पर असर

प्राकृतिक संरचना की कमी

लेखक का संवाद से संवाद

प्रिय,

वनों का विनाश केवल पौधों का नुकसान नहीं है।

यह मानवता के भविष्य का नुकसान है।

जब भी कोई पेड़ प्यारा,

तो यह प्रश्न अवश्य पूछें:

“क्या यह आवश्यक था?”









Comments

Popular posts from this blog

“अंधी जनता, भ्रष्ट व्यवस्था”

  किताब का शीर्षक " अंधी जनता, (भ्रष्ट) व्यवस्था" प्रस्तावना यह पुस्तक किसी नेता, अधिकारी या संस्था के खिलाफ व्यक्तिगत आरोप नहीं है, बल्कि उस सोच, व्यवस्था और समाज की स्थिरता का सवाल है, जो धीरे-धीरे एक सामान्य व्यवहार को जन्म देती है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में लोकतंत्र की शक्ति है। यहां जनता ही असली मालिक है, और नेता और अधिकारी उसका नौकर है। लेकिन समय के साथ-साथ यह संतुलन बिगड़ गया। नौकर मालिक बन गया और मालिक यानी जनता गायब हो गई। आज के हालात ऐसे दिखते हैं कि कई नेता जनता की सेवा के बजाय निजी नौकरों में लगे रहते हैं, कुछ अधिकारियों का कहना है कि, और आम जनता इन सब को देखकर भी चुप रहती है। यह शैली ही सबसे बड़ी समस्या है। जब अन्याय को सहना आदत बन जाए, जब गलत को देखकर भी आवाज न उठ जाए, जब अपराध को "काम करने का तरीका" मान जाए- तब समाज धीरे-धीरे अपनी नैतिक शक्ति खो देता है। यह पुस्तक मौन टूर पर मौजूद है। यह प्रश्न उठाती है— क्या सच में सभी नेता घटिया हैं? जनता सच में आँधी, बाहरी और गाँव का क्या मतलब है? या फिर व्यवस्था ने लोगों को ऐसा ब...

🌸✍️खूबसूरती एक धोखा ​​है:✍️✍️

  खूबसूरती एक धोखा ​​है: एक समय की बात है, एक छोटे से गाँव में एक लड़की रहती थी जिसका नाम था रिया। वो बहुत ही खूबसूरत थी और लोग उसकी खूबसूरती का जश्न मनाते थे। लेकिन रिया को अपनी ख़ूबसूरती पर बहुत इज़्ज़त आती थी। उसने अपनी खूबसूरती को अपने जीवन का सबसे बड़ा हिस्सा बना लिया था। एक दिन, एक आदमी रिया के गाँव में आया। उसका नाम था करण. वो बहुत ही स्मार्ट और चालाक था। करण ने रिया को अपनी ख़ूबसूरती के बारे में बताया और उसने कहा कि वो उसकी ख़ूबसूरती को दुनिया भर में पेश करेगा। रिया ने करण की बात मानी और उसके साथ मिलकर अपनी खूबसूरती को दुनिया भर में पेश करने का फैसला किया। लेकिन करण का असली इरादा कुछ और ही था। उसने रिया को अपनी ख़ूबसूरती के लिए धोखा दिया और उसकी ख़ूबसूरती को अपने लिए उपयोग किया। रिया को बहुत दुख हुआ. उसने करण को धोखा देना शुरू कर दिया। लेकिन फिर रिया ने एक बात समझ में आई। अपनी ख़ूबसूरती पर इज़्ज़त आना नहीं चाहिए। ख़ूबसूरती एक दोखा ​​है. रिया ने अपने जीवन को बदलने का फैसला किया। उसने अपनी खूबसूरती को अपने जीवन का सबसे बड़ा हिसा नहीं बनाया और अपने जीवन को खुशियों से भर दिया।...

The Festival of Greenery.…the Chhattisgarh Hareli festival.

 यहाँ छत्तीसगढ़ हरेली त्यौहार के बारे में लगभग 5,000 शब्दों की एक कहानी दी गई है: हरियाली का त्यौहार छत्तीसगढ़ के हृदय स्थल, जो संस्कृति और परंपरा से समृद्ध क्षेत्र है, में हरेली उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। यह त्योहार मानसून के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है, जो सूखी धरती पर नया जीवन लेकर आता है। एक छोटे से गांव में लीला नाम की एक छोटी लड़की इस त्यौहार का बेसब्री से इंतजार करती थी। उसने पिछले साल अपनी दादी से पारंपरिक नृत्य और गीत सीखे थे, जो समुदाय में एक सम्मानित बुजुर्ग थीं। जैसे-जैसे बारिश नज़दीक आती गई, गांव वालों ने जश्न मनाने की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने अपने घरों को चमकीले रंगों से सजाया, सुंदर हस्तशिल्प बनाए और अपने प्रदर्शनों का अभ्यास किया। त्यौहार के दिन, गांव संगीत, नृत्य और हंसी से सराबोर हो गया। लीला ने एक शानदार पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया, उसकी चालें सुंदर और सटीक थीं। गांव वालों ने देर रात तक खुशी मनाई और जश्न मनाया। अगली सुबह, गांव के लोग स्थानीय मंदिर में प्रजनन और समृद्धि के देवी-देवताओं की पूजा करने के लिए एकत्र हुए। उन्होंने भरपूर फसल सुनिश्चित करने क...